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आद्यन्त, अविरल, नितनूतन स: सनातन

जानिए मां का वह चमत्कारी मंदिर जहां जाने से दूर हो जाती है हकलेपन की बीमारी!

भारत में कई ऐसे दिव्य और अनोखे मंदिर हैं जिनका रहस्य बूझ पाना आसान नहीं है। ऐसा ही एक मंदिर देवी मां का है जिसे लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां जाने से हकलेपन की बीमारी दूर हो जाती है। और यहां आने वाला हर व्यक्ति अद्भुत चमत्कार का साक्षी बनता है।

मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर में जाने वाला न सिर्फ चर्म रोगों से मुक्ति पा जाता है बल्कि अगर उसे हकलेपन की बीमारी है तो वह भी हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाती है। देव भूमि उत्तराखंड में स्थित नैनीताल की ठंडी सड़क पर मौजूद है देवी मां का मंदिर पाषाण देवी के नाम से विख्यात है।

मान्यता है कि इस मंदिर (मंदिर की सीढ़ियों को स्पर्श क्यों करते हैं) का जल अभिमंत्रित है और इस जल के शरीर पर छींट पड़ने भर से किसी भी प्रकार के चर्म रोग दूर हो जाते हैं। नैनी झील के किनारे पहाड़ी पर बने इस मंदिर में मां भगवती विराजती हैं। इस मंदिर में मां की प्राकृतिक मूर्ति स्थापित है और यह माना जाता है कि यहां मां का साक्षात वास है।

इस मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि यहां मां भगवती के सभी 9 रूपों के दर्शन एक साथ होते हैं। असल में यहां प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई नौ पिंडियों को जल से स्नान कराया जाता है और फिर उसी जल को अभिमंत्रित किया जाता है। इस जल की महत्ता इतनी है कि श्रद्धालू दूर-दूर से जल लेने के लिए मंदिर आते हैं और जल लिए बिना मंदिर से जाते नहीं हैं।

इस मंदिर में आने वाले हर एक व्यक्ति का मानना है कि यहां मिलने वाला ये अभिमंत्रित जल त्वचा के रोग, वाणी के रोग, जोड़ों में दर्द, हाथ-पैरों में सूजन, हकलेपन आदि से छुटकारा दिलाने में बहुत लाभकारी है। इस जल को लोग अमृत के समान समझते हैं। इस मंदिर की एक मान्यता यह भी है कि यहां आने वाले लोग अपने आंतरिक विकार से भी निजात पा जाते हैं।

इस मंदिर में मां भगवती यानी कि मां दुर्गा की पूजा (दुर्गा चालीसा का पाठ) करने से व्यक्ति और उसके परिवार के लोगों को निरोगी होने का वरदान मिलता है। खास बात यह है कि मां के इस जल को हर 10 दिन में एक बार निकाला जाता है। इस जल को निकालने के लिए दिन, वार और तिथि बाकायदा सुनाई जाती है जिसके बाद लोगों का तांता लगना शुरू हो जाता है।

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