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आद्यन्त, अविरल, नितनूतन स: सनातन

अंतिम संस्कार के आखिर में क्यों फोड़ी जाती है मटकी ?

हिंदू धर्म में व्यक्ति के जन्म से मृत्यु तक सोलह संस्कार बताए गए हैं। इनमें सोलहवां तथा आखिरी संस्कार है अंतिम संस्कार।

इस संस्कार में व्यक्ति की अंतिम विदाई, दाह-कर्म से लेकर पुनः घर की शुद्धि तक किए जाने वाले क्रिया-कलाप शामिल किए जाते हैं।

गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार से संबंधित कई बाते बताई गई हैं जिनकी पालना करने पर मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है तथा उसके अगले जीवन में प्रवेश का रास्ता खुलता है. उन्हीं मे से एक होता है घड़ा का तोड़ना, तो आइये जानते हैं कि इसका मतलब क्या होता है

हिंदू धर्म में दाह संस्कार के दौरान मिट्टी का बर्तन तोड़ दिया जाता है। मटके को चिता पर रखे मृत व्यक्ति के चारों ओर ले जाया जाता है और मटके को तोड़ दिया जाता है। मटकी फोड़ने में गहरा प्रतीकवाद है.

▪️ छेद वाले घड़े में जल भरकर परिक्रमा की जाती है

दाह-संस्कार के समय एक छेद वाले घड़े में जल लेकर चिता पर रखे शव की परिक्रमा की जाती है और अंत में पीछे की और पटककर फोड़ दिया जाता है।

इस क्रिया को मृत व्यक्ति की आत्मा का उसके शरीर से मोह भंग करने के लिए किया जाता है। परन्तु इस क्रिया में एक गूढ़ दार्शनिक रहस्य भी छिपा हुआ है।

इसका अर्थ है कि जीवन एक छेद वाले घड़े की तरह है जिसमे आयु रूपी पानी हर पल टपकता रहता है और अंत में सब कुछ छोड़कर जीवात्मा चली जाता है और घड़ा रूपी जीवन समाप्त हो जाता।

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