भारत में पहली बार जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का जन्म, पशु आनुवंशिकी में नई उपलब्धि
बरेली में कैटल जीनोमिक्स समिट: जीनोमिक चिप, आईवीएफ और भ्रूण स्थानांतरण से तेज होगा नस्ल सुधार
बरेली@SanatanYatra. भारत में पशु आनुवंशिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। बरेली में लीड्स जेनेटिक्स के बीएल कामधेनु रिसर्च सेण्टर में आयोजित कैटल जीनोमिक्स समिट 2026 के दौरान पहली बार जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का जन्म हुआ है। इसे भारत-ब्राजील पशु आनुवंशिकी सहयोग को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस प्रक्रिया में जीनोमिक चयन, आईवीएफ, भ्रूण स्थानांतरण और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन जैसी तकनीकों को एक साथ इस्तेमाल किया जा रहा है।
लीड्स जेनेटिक्स के अनुसार, नई जीनोमिक तकनीक के जरिये पशुओं के डीएनए में मौजूद 95हजार से अधिक आनुवंशिक मार्करों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे भ्रूण के दौरान ही ऐसे पशुओं की पहचान संभव होगी, जिनमें बेहतर दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता, विकास, स्वास्थ्य, गर्मी सहने की क्षमता तथा टिक और परजीवियों के प्रति प्रतिरोध जैसे वांछित गुण मौजूद हैं।
पारंपरिक पशु प्रजनन व्यवस्था में किसी पशु की आनुवंशिक क्षमता का आकलन करने के लिए कई वर्षों तक उसके प्रदर्शन और संतानों के आंकड़ों की जरूरत पड़ सकती है। जीनोमिक चयन इस प्रक्रिया को काफी पहले शुरू करने का अवसर देता है। इससे बेहतर आनुवंशिक गुणों वाले पशुओं का चयन कर ब्रीडिंग प्रोग्राम को अधिक सटीक बनाया जा सकता है।
समिट में पहली ज़ेबू-ऑप्टिमाइज़्ड बोवाइन एसएनपी चिप के आगमन और इल्युमिना नोवासीक एक्स प्लेटफॉर्म पर नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल पशुधन आबादी विकसित करने में मदद कर सकती है।
जीनोमिक चयन क्या बदलेगा?
- हजारों आनुवंशिक मार्करों के आधार पर पशु का डीएनए आकलन।
- कम उम्र में बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं की पहचान।
- दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता जैसे गुणों के आधार पर अधिक सटीक चयन।
- आईवीएफ और भ्रूण स्थानांतरण के बीएल का मधेनु फार्म्स में आयोजित दो दिवसीय कैटल जीनोमिक्स समिट 2026 में पशु आनुवंशिकी और आधुनिक ब्रीडिंग तकनीकों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। 14 और 15 सितंबर को आयोजित समिट में जीनोमिक्स, आईवीएफ, एडवांस्ड सीक्वेंसिंग, जेनेटिक इव जरिए बेहतर जेनेटिक्स का तेजी से प्रसार।
- भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल पशुधन विकसित करने की संभावना।
40–60 लीटर तक दूध का अनुमान
कंपनी के अनुसार जेनेटिकली सेलेक्टेड गायों से उच्च गुणवत्ता वाले दूध का उत्पादन होने की उम्मीद है। ऐसे पशुओं में औसतन 40–60 लीटर प्रतिदिन प्रति गाय दूध उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया गया है। हालांकि वास्तविक उत्पादन पशु की आनुवंशिकी के साथ-साथ पोषण, स्वास्थ्य और फार्म मैनेजमेंट पर भी निर्भर करेगा।
