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October 20, 2026

संकटा देवी मंदिर वाराणसी : यहां मिलता हैं कन्याओं को मनपसंद वर

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संकटा देवी मंदिर वाराणसी@sanatanyatra. : संकटा देवी आदिशक्ति देवी दुर्गा का एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है कि यहां जो भी कन्या सच्चे मन से माँ से जीवन साथी के लिए प्रार्थना करती हैं तो उसे जीवन में मनचाहा वर की प्राप्ति है। मान्यता है कि जो भी भक्त माता के मंदिर में पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ आता हैं माँ उसकी मुरादें अवश्य पूरी करती है।
माता संकटा मंदिर मां भगवती के 32 शक्तिपीठों में से 16वें शक्तिपीठ के रूप में स्थापित उत्तर प्रदेश के लालगंज क्षेत्र के गेगांसों में स्थापित है। जहां मां को देवी संकटा के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है यह मंदिर अपनी अद्भुत विशेषताओं के चलते न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अन्य शहरों में भी प्रसिद्धि हासिल किए हुए हैं।य हां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की हर तरह की इच्छा पूरी होती है।

इतिहास :

मंदिर की स्थापना के विषय में जनश्रुति है कि 12वीं शताब्दी में भार शिव शासकों के पराभव व वैश क्षत्रियों के उछ्वव का समय था। उस समय बैसवारा के क्षत्रिय राजा त्रिलोक चंद्र नि:संतान थे।उन्होंने काशी के विद्वान महर्षि पुंजराज बाबा से पुत्र प्राप्ति की याचना की थी। जिस पर पुंजराज बाबा ने चिलौला गांव में पु़त्रयेष्टि यज्ञ कराया था जिसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। इस तपो भूमि पर रुककर पुंजराज बाबा ने इसे अपनी तपोस्थली बनाया था।

जनश्रुति :

ऐसी मान्यता है कि लगभग सौ वर्ष पूर्व एक पागल व्यक्ति ने माता संकटा की मूर्ति की गर्दन पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया था।कुछ दिन बाद उसी कटे स्थान से पानी व मवाद आने लगा।बाद में माता ने एक माली को स्वप्न में आकर कटे स्थान पर घी का फीहा रखने को कहा।माली की सेवा से मवाद आना बंद हो गया ¨कतु आज भी प्रहार का निशान माता संकटा की मूर्ति मे देखा जा सकता है।

स्थिति: गर्ग पीठ के 11वें अधिष्ठाता भगवान श्रीकृष्ण का नामकरण संस्कार व गर्ग संहिता का प्रणयन करने वाले महर्षि गर्ग की तपोस्थली गेगासों नगर से 15 किलोमीटर दूर लालगंज-फतेहपुर मुख्य मार्ग पर गंगा नदी के पावन तट पर स्थित है। कहते हैं कि दिगंबर स्वामी अनंगबोध महराज असनी स्थित अपने आश्रम से ब्रम्ह मुहूर्त में नदी की जल धारा के ऊपर खड़ाऊ पहन कर मंदिर दर्शन करने आते थे।

समस्त मनोकामनाएं होती हैं पूरी

जैसे कि हम ने उपरोक्त बताया कि कि यहां कुंवारी कन्याएं अपने मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए देवी मां से वरदान मांगने आती हैं। इसके अलावा जिन दंपतियों को संतान नहीं हैं वे लोग भी यहां मन्नत लेकर आते हैं जिसके बाद उनकी सूनी गोद भर जाती हैं।

मन्नतों के इस मंदिर में आने वाले भक्तों का कहना है कि देवी दुर्गा को समर्पित संकटा मंदिर में लाल चुनरी बांधने से सभी की मनोकामना पूरी होती है और उनकी झोली खुशियों से भर जाती हैं। अन्य प्रचलित मान्यताओं के अनुसार मन्‍नतें पूरी होने के बाद भक्त मां को उनको प्रिय सिंघाड़े का लड्डू अर्पित करते हैं।

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